TIL Desk #Astro/ गायत्री मंत्र को वेदों में बड़ा ही चमत्कारी और फायदेमंद बताया गया है। वेदों की कुल संख्या चार है। इन चारों वेदों में गायत्री मंत्र का उल्लेख किया गया है।
माना जाता है कि इस मंत्र में इतनी शक्ति है कि नियमित तीन बार इसका जप करने वाले व्यक्ति के आस-पास नकारात्मक शक्तियां नहीं फटकती हैं।
गायत्री मंत्र को पढ़ते समय आरामदायक स्थिति में बैठना चाहिए, जैसे पदमासन, अर्ध पद्मासन और सिद्धआसन। किसी आसान पर बैठकर ही गायत्री मंत्र का जप करना चाहिए।
- इस मंत्र का जाप नहाधोकर साफ-सुथरे कपड़े पहनकर करना चाहिए।
- गायत्री मंत्र का जप सूर्योदय से दो घंटे पूर्व से लेकर सूर्यास्त से एक घंटे बाद तक किया जा सकता है। मौन यानी मानसिक जप कभी भी कर सकते हैं, लेकिन रात्रि में इस मंत्र का जप नहीं करना चाहिए। माना जाता है कि रात में गायत्री मंत्र का जप लाभकारी नहीं होता है।
- अगर माला से गायत्री मंत्र का जप करना चाहते हैं तो 108 मनकों की माला को रखें। इसके लिए तुलसी या चंदन की माला रखें।
- इस मंत्र को जल्दी -जल्दी नहीं पढ़ना चाहिए। इसके महत्व और अर्थ को समझकर ही उच्चारण करना चाहिए।

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