नई दिल्ली डेस्क/ कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट, यानी सीयूईटी 15 जुलाई से आयोजित की जाएगी। यह टेस्ट अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर होगा, क्योंकि भारत के बाहर के विश्व के 13 विभिन्न शहर भी इस परीक्षा का हिस्सा होंगे। कुल 13 विदेशी और 554 भारतीय शहरों में यह परीक्षा आयोजित की जाएगी। 85 भारतीय विश्वविद्यालय इस प्रक्रिया के माध्यम से अंडर ग्रजुऐट पाठ्यक्रमों में छात्रों को दाखिला प्रदान करेंगे।
कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी) के लिए पंजीकरण कराने की आखिरी तारीख 31 मई थी। यूजीसी चेयरमेन एम जगदीश कुमार के मुताबिक अब प्रवेश परीक्षा 15 जुलाई से 10 अगस्त तक है। परीक्षा में हासिल किए गए अंकों की मैरिट के आधार पर दाखिले होंगे। कॉलेजों में अंडर ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों हेतु बारहवीं कक्षा के सिलेबस के आधार पर ही सेंट्रल यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी) लिया जाएगा। कॉलेजों में दाखिले के लिए अन्य किसी कक्षा के सिलेबस के आधार पर एंट्रेंस टेस्ट में प्रश्न नहीं पूछे जाएंगे। बारहवीं कक्षा में हासिल किए गए अंकों का भी महत्व नहीं होगा। इस कॉमन एंट्रेंस टेस्ट में 11वीं कक्षा के सिलेबस से प्रश्न नहीं लिए जाएंगे।
यह परीक्षा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा ली जा रही है। परीक्षा 15, 16, 19, 20 जुलाई और 4 से 10 अगस्त तक चलेगी। 17 जुलाई को नीट यूजी की परीक्षा होने के कारण सीयूईटी नहीं है। इसी तरह 21 जुलाई से 3 अगस्त तक जेईई मेन परीक्षा है इसलिए इस बीच भी सीयूईटी नहीं है। वहीं गुरूवार को एनटीए एक करेक्शन विंडो खोली है। अंडर ग्रजुऐट पाठ्यक्रमों में दाखिला के लिए अपना पंजीकरण करवा चुके छात्र 23 और 24 जून को अपने पंजीकरण फार्म में सुधार कर सकते हैं।
एनटीए के मुताबिक 11 लाख से अधिक छात्रों ने इस परीक्षा के लिए आवेदन किया है। सीयूईटी में कुल 85 विश्वविद्यालय हिस्सा ले रहे हैं। इनमें केंद्रीय विश्वविद्यालयों के अलावा, राज्यों के 13 विश्वविद्यालय, 10 डीम्ड विश्वविद्यालय और 19 निजी विश्वविद्यालय शामिल हो रहे हैं। इनमें दिल्ली विश्वविद्याल, जामिया मिल्लिया विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय आदि शामिल हैं। हालांकि, यूजीसी ने हाल ही में जारी किए गए अपने नोटिस में बताया है कि पूर्वोत्तर राज्यों के 8 और उत्तराखंड के 1 विश्वविद्यालय को सीयूईटी की अनिवार्यता से अलग रखा गया है।
केंद्रीय विश्वविद्यालय के अलावा कई राज्य स्तरीय एवं प्राइवेट यूनिवर्सिटी भी सीयूईटी को मान्यता दे रही हैं। यूजीसी चेयरमैन प्रोफेसर एम जगदीश कुमार ने विभिन्न राज्य स्तरीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से सेंट्रल यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट के विषय पर चर्चा की है।
यह प्रवेश परीक्षा 13 अलग-अलग भाषाओं में आयोजित की जाएगी। इनमें इंग्लिश, हिंदी, मराठी, असमिया, बंगाली, तेलुगू, कन्नड़, मलयालम, ओड़िया, गुजराती, तमिल, पंजाबी और उर्दू भी हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी है। प्रसिद्ध शिक्षाविद सीएस कांडपाल के मुताबिक ऐसे में छात्रों को न केवल अपनी मातृभाषा में परीक्षा देने का विकल्प मिलेगा बल्कि हिंदी मीडियम के छात्र अंग्रेजी के कारण भेदभाव का शिकार भी नहीं बनेंगे।
देश के सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी) लागू किया जा चुका है। यह परीक्षाएं नेशनल टेस्टिंग एजेंसी, (एनटीए) द्वारा ली जाएंगी। एनटीए ने कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट 2022 में छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इसी क्रम में माकिर्ंग स्कीम में भी संशोधन किया गया है। सीयूईटी यदि प्रश्नन में कोई प्रश्न गलत पाया जाता है या कोई किसी प्रश्न को वापस लिया जाता है, तो ड्रॉप किए गए प्रश्न के बदले उम्मीदवारों को 5 अंक दिए जाएंगे।
कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी) साल में दो बार होंगे। हालांकि इसके लिए अभी इंतजार करना होगा। यह परीक्षाएं साल में दो बार करने का निर्णय अगले वर्ष से लागू किया जाएगा। अंडर ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए इस एंट्रेंस टेस्ट के 2 सेशन आयोजित होने पर छात्रों को अधिक विकल्प उपलब्ध हो सकेंगे।
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