यूपी डेस्क/ पेट्रोल पंप पर चिप से तेल चोरी मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एफआईआर दर्ज करने में लापरवाही पर फटकार लगाई है| कोर्ट ने कहा कि संज्ञेय अपराध सामने आने पर भी सरकारी अफसर एफआईआर कैसे दर्ज नहीं कर रहे हैं? यह उनकी जिम्मेदारी है| कोर्ट ने कहा कि पेट्रोल-डीजल वितरण यूनिट्स में डिवाइस लगाना पेट्रोल पंप मालिकों के अकेले वश की बात नहीं है| इसके में आॅयल कंपनियों, सरकारी विभागों व नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं| क्योंकि ये ही लोग नियमित निरीक्षण करते थे|
मामले में मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने हलफनामा दाखिल किया तो वहीं तेल कपंनियों की तरफ से भी हलफनामे दाखिल किए गए| हाईकोर्ट ने एसएसपी एसटीएफ द्वारा आईजी एसटीएफ को 24 मई को लिखे एक पत्र के हवाले से कहा कि 3 मई से 20 मई तक कई पेट्रोल पंपों की जांच हुई और वहां चिप लगा हुआ मिला| लेकिन एक पर भी एफआईआर सरकार ने दर्ज नहीं करवाई| केवल वितरण यूनिट सील किए गए|
कोर्ट ने कहा, “पेट्रोल कंपनियों ने जिन पेट्रोल पंप डीलरों को लाइसेंस दिए, उन्होंने पूरे प्रदेश में विस्तृत तौर पर खुला अपराध किया|” एसटीएफ ने 27 अप्रैल को लखनऊ में सात जगह छापे मारकर इसका खुलासा किया तो पाया कि 5 लीटर पेट्रोल खरीदने पर 200 मिलीलीटर से 500 मिलीलीटर तक कम पेट्रोल बेचा जा रहा था| इसके बाद कई पेट्रोल पंपों पर ये फर्जीवाड़ा पकड़ गया लेकिन एफआईआर सिर्फ दो के खिलाफ ही दर्ज की गई| हाईकोर्ट ने कहा कि इस घपले की खबरें मीडिया में आईं, जिनमें कुल 23 लोगों को गिरफ्तार किया गया| एसटीएफ ने रवींद्र नाम के व्यक्ति को पकड़ा|

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