TIL Desk/ ” भगवाकरण ” भारत भूमि की प्रकृति स्वयं चाहती है | जैसे हालत इस समय देश में बन रहे है उसे देखते हुए बीजेपी-मोदी की विचारधारा देश हित के लिए आवश्यक जान पड़ती है | पिछले कई वर्षों में देश के प्रधानमंत्रियों ने अपना स्पष्ट एजेंडा लोकतंत्र के सामने नहीं रखा | जिसके कारण विश्व पटल पर ताक़तवर देशों ने भारत का झंडा उठने न दिया | लेकिन हिंदुत्वादी छवि लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी स्पष्ट नीति से देश को नयी पहचान दी | ये बात अलग है कि उन पर जो अल्पसंख्यक समुदाय के विरोधी होने की छाप लगी है वो आसानी से नहीं मिट पा रही है | आतंकवाद, नक्सलवाद, अलगाववाद और माओवाद की गिरफ्त से जूझ रहे देश को मोदी की स्पष्ट नीति मिली | जहाँ समझौता न करते हुए देश के विकास पर ज़ोर दिया गया | कश्मीर, नोटबंदी और भ्रष्टाचार पर सीधी रेखा खींची गयी जिससे देश को सुशासन मिल सके | साथ ही साथ हिन्दू राष्ट्र का निर्माण भी होता रहा जहाँ आरएसएस की विचारधारा से भी लोकतंत्र को दोचार होना पड़ा | मस्ज़िद तोड़े नहीं जायेगे पर मंदिर निर्माण की बात दबी जुबां होती रही | अल्पसंख्यकों के बारे में खुल के कुछ नहीं कहा पर तीन तलाक़ के मामले में अल्पसंख्यक पुरुषों से बैर लेते हुए महिलाओं के दिल को छुआ | शायद यही से सबका साथ और सबका विकास के नारे को चरित्रार्थ किया | आलोचनाओं और हिंदुत्ववादी छवि के बीच वामपंथी विचार के सीधे राडार पर दिखे | जहाँ से उन्हें अपने ही घर गुजरात से युवा पटेल नेता हार्दिक पटेल से आरक्षण मुद्दे पर चुनौती मिली तो दिल्ली में वामपंथी विचारधारा युवा नेता कन्हैया कुमार के द्वारा लाल सलाम झेलना पड़ा |
मोदी शासनकाल में घट रही घटनाओं को पड़ोसी देश बाक़ायदा नज़र गड़ाये देख रहे है | चीन और पाकिस्तान इसका पूरा फ़ायदा लेना चाहते है | चीन अन्य देशों के साथ मिलकर भारत को घेर रहा है | वर्तमान की विदेश नीति से घबराकर तिब्बत-दलाई लामा और अरुणांचल जैसे मुद्दे को हवा दे रहा है | मोदी ने तिब्बत के मुद्दे पर चीन की एक न सुनी दलाई लामा के विषय में स्पष्ट नीति दिखाई और चीन की धमकी को शीशा दिखाया | मोदी ने अपने शपथ समारोह में भी चीन को किसी प्रकार का तवज्जो नहीं दिया था | भारत ने चीन को स्पष्ट कह दिया है भारत के किसी भी हिस्से पर चीन का अधिकार नहीं है चीन अरुणाचल को अपना हिस्सा न बताये |
वर्तमान में भारतवर्ष को विश्व के मानचित्र पर देखकर अन्य देश और उनके राष्ट्राध्यक्ष अपने-अपने नज़रिये से देखते है | कोई भारत को अपने लिए खतरा मानता है तो कोई भारत को अपना सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी | इसमें सबसे अहम बात ये है कि अन्य देशो के राष्ट्राध्यक्षों की जैसी राय उनके नागरिको के सामने आती है, वैसी ही राय उस देश के नागरिक अपने मन में बना लेते है | चीन और पाकिस्तान इस कड़ी में सबसे आगे है साथ ही बांग्ला देश और नेपाल ने भी अब भारत को अपनी कूटनीति का हिस्सा बना लिया है | अफ़ग़ानिस्तान से भारत के जैसे संबंध है उससे भारत को ज़्यादा खतरा तो नहीं पर पाकिस्तानी अलगाववादियों की बढ़ती पैठ की वजह से पत्थर की लकीर बना कर कुछ कहा नहीं जा सकता है | अमेरिका की ट्रम्प सरकार ने भी भारत के प्रति अपना नजरिया बहुत साफ़ नहीं किया है | यूरोपीय देश भारत को अब भी अपने से बहुत पीछे मानते है |
लेकिन चीन ने भारत की दूरदर्शिता को भांप लिया है और किसी न किसी बहाने भारत को आगे बढ़ने का मौका नहीं देना चाहता है | उसका निशाना भारत की समुद्री सीमायें है और हिमालय का सीमावर्ती क्षेत्र है | वो पाकिस्तान, नेपाल और बर्मा के साथ मिलकर देश की घेरा बंदी करना चाह रहा है | चीन ने पाकिस्तान के साथ मिलकर बलूचिस्तान से सटे भारतीय सीमा पर बिज़नेस कॉरिडोर और सैनिक चौकी बनाना शुरू कर दिया | जिससे वो भारत के उत्तर पश्चिम क्षेत्र पर अपनी नज़र गढ़ा सकेगा साथ ही पीओके बॉर्डर पर भी दखल कर रहा है | वहीँ चीन दूसरी तरफ भारत के अरुणाचल प्रदेश से भारत की घेराबंदी करने पर तुला है | चीन ने भारत के अरुणाचल प्रदेश को विवादित क्षेत्र कहकर वहां के नागरिको को भारत के प्रति नया दृष्टिकोण दे दिया है | चीन के द्वारा जबरन दक्षिणपंथी विचारधारा को भारत में थोपा जा रहा है | नक्सलवाद और माओवाद का भयानक चेहरा भारत झेल रहा है | ऐसा इसलिए भी है क्योंकि भारत में वाम दलों ने अपना अस्तित्व बनाये रखने के लिए युवा पीढ़ी को लाल सलामी देकर सत्ता का रास्ता दिखाया है |
लाल सलाम के रिमोट कण्ट्रोल रूम के संचालकों और उनके सेनापतियों ने स्लीपिंग सेल के तौर पर जगह-जगह अपना मानव बम बिछा रखा है जो कही भी और कभी भी फट जाता है | पूर्वोत्तर राज्यो से लेकर पूर्वी-दक्षिण राज्यो में वामपंथी विचारधारा ने पैठ बनाई है | पश्चिम बंगाल, बिहार, असम, अरुणाचल ओडिशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, केरल और कर्नाटक से निकल कर स्लीपिंग सेल जगह-जगह फैल गए है | विश्वविद्यालय इनकी शरण स्थली बने हुए है | सत्ता पर काबिज़ रहने के लिए कुछ राजनीतिक पार्टियाँ इनको आश्रय भी देती है | काल मार्क्स के सिद्धान्तों पर चलने वालों को ये पता नहीं कि मार्क्स का जीवन सुख सुविधाओं और भोग विलास से भरा पड़ा था | उसने महज अपनी विचारधारा लोगों में फैलानी शुरू कर दी और आगे चलकर इसने सिर्फ ख़ूनी खेल ही रचा |
जिस तरह से देश में आतंकवादियो एवं राष्ट्रद्रोहियों की मृत्यु और उनकी सजा पर चिंतन मनन व् सियापा हो रहा है वो बड़े खतरे की घंटी है | अफ़ज़ल गुरु का शहादत दिवस, क़साबोत्सव, रावण पूजा और महिषासुर पूजन जिस तरह से वामपंथी मना रहे उससे साफ़ लगता है कि वो भारत के सनातम धर्म और देश के लिए शहीद हुए जवानोँ का माख़ौल उड़ा रहे है | देश में भारत विरोधी नारे लगाने वालों को राजनेताओं का आश्रय मिल रहा वो ऐसा सिर्फ सत्ता में बने रहने के लिए कर रहे है | विश्व का इतिहास गवाह है वामपंथियों ने अपना अस्तित्व बनाये रखने के लिए अपने ही देश के सीने में छुरा घोपा है, प्रथम विश्वयुद्ध में जर्मनी ने इस दंश को झेला है |
सनातन धर्मी राष्ट्र में लोग हिन्दुत्व व् राष्ट्रवाद की बात करने से डरते है | देशद्रोहियों और अलगाववादियों का समर्थन करने से नहीं | वामपंथी विचारक सत्ता का सुख भोगते है लेकिन भारत माता की जय कहने से कतराते है सिर्फ ध्रुवीकरण और तुष्टिकरण की राजनीति के लिए | इन स्थितियों से जूझते भारत को देश की प्रकृति ने भगवा कर दिया है जिसमें वामपंथी विचारधारा का लाल रंग धुँधलाने लगा है |
-आर एस सिसोदिया (टीवी इंडिया लाइव)
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