लखनऊ डेस्क/ उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वैच्छिक परिवार कल्याण प्रोत्साहन भत्ता सहित लाखों कर्मचारियों को मिलने वाले छह भत्ते खत्म कर दिए हैं। इससे करीब दो लाख कर्मचारी प्रभावित होंगे। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद सरकार के इस कदम के खिलाफ मोर्चा खोलने की रणनीति तैयार कर रहा है। कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी ने बताया कि “सरकार ने बहुत गलत किया है, और यह सीधा कर्मचारियों पर कुठाराघात है। इससे हमारे लगभग दो लाख से अधिक कर्मचारियों को सीधे नुकसान होगा।”
गौरतलब है कि सरकार द्विभाषी प्रोत्साहन भत्ते के रूप में 100 रुपये और 300 रुपये प्रतिमाह देती है। लेकिन अब द्विभाषी टाइपिंग अनिवार्य अर्हता बन गई है। कंप्यूटर संचालन व प्रोत्साहन भत्ता अब अनिवार्य अर्हता है। इसके अलावा स्नातकोत्तर भत्ता अधिकतम 4500 रुपये दिए जाते रहे हैं। कैश हैंडलिंग भत्ता कैशियर, अकाउंटेंट, स्टोरकीपर को नगदी भंडारों व मूल्यवान वस्तुओं की रक्षा के एवज में दिया जाता था। परियोजना भत्ता-सिंचाई विभाग कार्यस्थल के पास आवासीय सुविधा न होने के एवज में दिया जाता था।
स्वैच्छिक परिवार कल्याण प्रोत्साहन भत्ता सीमित परिवार के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए था, जिसके तहत न्यूनतम 210 रुपये, अधिकतम 1000 रुपये दिए जाते थे। लेकिन अब इन सभी भत्तों को सरकार ने खत्म कर दिया है। तिवारी ने कहा, “स्वैच्छिक परिवार कल्याण भत्ता से कर्मचारी परिवार नियोजन के माध्यम से दो बच्चों की प्लानिंग करते थे और सीमित दायरे में परिवार चलाते थे और बच्चों की पढ़ाई के लिए इससे मिलने वाली राशि को खर्च करते थे। लेकिन सरकार ने इसे बंद कर हम लोगों का नुकसान किया है। इसके लिए हम लोग 27 अगस्त को सरकार के खिलाफ आंदोलन करने जा रहे हैं।”

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