यूएन डेस्क/ भारत ने अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों का उल्लंघन करने वालों को न्याय के कटघरे में लाने और संघर्ष की स्थिति में फंसे मानवाधिकारकार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों की जरूरत पर बल दिया है।
भारत के डिप्टी स्थायी प्रतिनिधि तन्मय लाल ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा, “सशस्त्र संघर्ष के पक्षकार अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों का उल्लंघन करते रहते हैं और मानवाधिकारों का गंभीर दुरुपयोग कर भी बच निकलते हैं। महिलाएं और बच्चे इसके सबसे अधिक शिकार होते हैं और उनकी सुरक्षा के लिए विशेष कदम उठाए जाने जरूरी हैं।”
उन्होंने कहा, “हमें अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों का उल्लंघन करने वालों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के ढांचे को मजबूत करने की जरूरत है।” लाल ने कहा कि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की सुरक्षा चिंता का विषय है और इस पर गंभीर रूप से ध्यान दिए जाने की जरूरत है, खासतौर पर सशस्त्र संघर्ष की स्थिति में।
उन्होंने कहा, “हम मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और संयुक्त राष्ट्र कर्मियों की सुरक्षा के प्रस्ताव का स्वागत करते हैं।” मानवाधिकार संगठनों के आचरण का विषय उठाते हुए लाल ने कहा कि उन्हें यौन शोषण के मामलों में जीरो टालरेंस की नीति सख्ती से लागू करनी चाहिए और पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
संघर्ष या प्राकृतिक आपदाएं झेल रहे देशों और लोगों को मानवीय सहायता प्रदान करने के भारत के प्रयासों को रेखांकित करते हुए लाल ने कहा कि भारत ने पिछले चार सालों में 90,000 लोगों को बचाया है जिनमें 50 अन्य देशों के लोग भी शामिल हैं।

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